Showing posts with label जिज्ञासा. Show all posts
Showing posts with label जिज्ञासा. Show all posts

Monday, 24 July 2017

कितना उचित है अपने ठाकुर जी को टोकरी में लेकर घूमना

क्या अपने ठाकुर जी को तो टोकरी में लेके घूमना चाहिए ?





http://www.youtube.com/user/hemangnangia 
दासाभास डा गिरिराज नांगिया, वृन्दावन धाम द्वारा आध्यत्मिक और भक्ति भाव सम्बन्धी जिज्ञासाओं का जन साधारण की भाषा में समाधान और रसिक भैया कृष्णदास भूटानी (सिरसा वाले) के सुमधुर भजनों का अनमोल संग्रह और लगभग प्रतिदिन अपडेट होने वाला youtube चैनल। आज ही सब्सक्राइब करें और आनंद प्राप्त करें।

Friday, 14 July 2017

Jivan me prashan aavashyak

जीवन में प्रश्न आवश्यक

✔  *जीवन में प्रश्न आवश्यक*    ✔

▶ गीता में कहा गया है "तद्विद्धि प्रणिपातेन परि प्रश्नेन सेवया" । ऐसा करने पर साधु संत लोग उपदेश करते हैं । और उनके उपदेश पर आचरण कर के दासाभास साधक का कल्याण होता है ।

▶ प्रश्न का अर्थ जिज्ञासा ।
हम जीव, चाहे लौकिक विषय हो, चाहे पारमार्थिक । पेट से सीखे तो आते नही ।

▶ दासाभास या आप कुछ भी करते हैं तो उस विषय में निश्चित ही हमारे सामने कुछ समस्याएं आती है,  कुछ बाधाएं आती हैं और उनके समाधान के लिए हमारे मन में प्रश्न खड़े होते हैं ।

▶ प्रश्न खड़े होने पर अवश्य ही उनका समाधान करना चाहिए, करवाना चाहिए ।

▶ इस विषय में हम महान गलती करते हैं कि एरे गैरे नत्थू खैरे से उन विषयों पर चर्चा करने लग जाते हैं । दासाभास ये गलती नही करता ।

▶ जबकि जब हमारा इनकम टैक्स का नोटिस आता है तो हम डॉक्टर के पास नहीं जाते, हम ऐरे गैरे नत्थू गैरे से बात नहीं करत, हम इनकम टैक्स के वकील या  C A से ही उस विषय में सलाह करते हैं ।

▶ इसलिए जब हमें भक्ति या भजन में कोई बाधाएं आती हैं । प्रश्न आते हैं तो हमें योग्य आचरण शील संत विद्वान गुरुदेव आदि से ही उनका समाधान कराना चाहिए ।