Monday, 4 February 2013

278. guru - chela

guru - chela

गुरु - चेला 

कुछ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं की 
हम कृष्ण से डायरेक्ट प्रेम करते हैं 

दो प्रेमियों के बीच में तीसरे = गुरु को लाने की 
क्या ज़रुरत है ?

एक बार शांति से अपने आप से पूछें की 
फिर आप बीच मैं गुरु क्यों बने हुआ हो ?

आपके पास आने वाले लोगों को अपना चेला 
क्यों बनाते हो ?

जो पहले से किसी के चेले हैं , शास्त्र केवल व केवल 
उन्हें ही चेला बनाने की इजाज़त देता है 

बिना स्वयं गुरु धारण किये गुरु बन्ने से 
समय आने पर बहुत बुरा हश्र होता है।
-- 
JAI SHRI RADHE

DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA
Lives, Born, Works = L B W at Vrindaban

Wednesday, 5 December 2012

277. krishn mere hn

श्री कृष्ण मेरे हैं 
श्री कृष्ण मेरे हैं -इस भाव को मदीयता भाव कहते हैं 

अर्थात-उनकी सेवा, उनका ध्यान मुझे 
रखना है - इसे भक्ति भी कहते हैं 
= श्री कृष्ण की अनुकूलता पूर्वक उनकी सेवा। 


मैं श्री कृष्ण का हूँ 
इस भाव को तदीयता भाव कहते हैं 

खुद की  जिम्मेदारी भी उन पर डाल  देना  
हर समय अपने दुखों की बात करना 
अपने संकटों को दूर करने वाला एक शक्ति मानना
बस अपने रोने रोते रहना, उनकी सेवा की कोई बात नहीं   

JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA
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Tuesday, 4 December 2012

276. JAGADGURU



जगद्गुरु 

जो समस्त जगत का गुरु हो,
वह जगद्गुरु 

और जिसका एक भी शिष्य न हो 
वह भी जगद्गुरु ?

समाधान आमंत्रित है 

JAI SHRI RADHE

DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA
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Friday, 16 November 2012

275. SABKE LIYE ALAG - ALAG


SABKE LIYE ALAG - ALAG

सबके लिए अलग-अलग

एक निकम्मे के लिए आदेश है - काम करो

जब काम करने लग गया तो आदेश हुआ -
गलत काम मत करो , अच्छे काम करो

जब काम के साथ कामना को जोड़ने लगा तो
आदेश हुआ- निष्काम कर्म करो

जब निष्काम कर्म करने लगा तो आदेश हुआ-
कर्ता - पन  का अभिमान त्यागो
तुम कर्ता नहीं हो करने वाला तो भगवान् है

अतः स्तर  व योग्यता  व अधिकार के अनुसार आदेश है
एक व्यभिचारी बलात्कार करने के बाद यह कहे की
कर्ता  तो भगवान् है, में कर्ता नहीं हूँ, तो
अनर्थ हो जाएगा

गलत काम- वासना से, सकाम  कर्म - स्वार्थ से
काम का अभिमान - मुर्खता से आता है

JAI SHRI RADHE

DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA
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http://shriharinam.blogspot.in/2011/08/time-nhi-hai.html

274. TIME NHI HAI-2

TIME NHI HAI-2


टाइम नहीं है

यदि टाइम नहीं होता तो -
1. फेस बुक पर इतने सारे लोग नहीं होते
2. टी वी देखना व बिकना बंद हो गए होते
3. क्रिकेट देखना, विशेषकर स्टेडियम में जाकर देखना बंद हो जाता
4. मोबाईल पर घंटों  इधर की बातें उधर कौन करता
5. घुमने के शहरों के होटल खाली पड़े होते

अतः टाइम तो पूरा का पूरा 24 घंटे है ही
हम जिस काम को करना चाहते हैं, उसके लिए
टाइम है, दुसरे के लिए नहीं।

अतः 'इस काम के लिए टाइम नहीं है' या
'तुम्हारे लिए टाइम नहीं है'-ऐसा कहना उचित होगा।

JAI SHRI RADHE

DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA
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Friday, 9 November 2012

273. CHAAR PRAKAR K SHABD


चार प्रकार के शब्द

१. जातिवाचक: 
यह एक मनुष्य है =  मनुष्य वाचक (पशु या पक्षी नहीं ).

२. गुण वाचक: 
यह एक गोरा मनुष्य है. गोरा = गुण 

३. क्रिया युक्त 
यह गोरा मनुष्य भाग रहा है. भागना= क्रिया.

४. यदृच्छा (इच्छा से नाम रखो ): 
यह रमेश (नामक) गोरा मनुष्य भाग रहा है. 

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JAI SHRI RADHE


DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia
made to serve ; GOD  thru  Family  n  Humanity
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Thursday, 8 November 2012

272. BHAKTI AMAR HAI

BHAKTI AMAR HAI


अमृतस्वरूप भक्ति 

नारद भक्ति सूत्र का दूसरा सूत्र है 
जिसके अनुसार भक्ति अमृत स्वरुप है ,अथवा अमृत है

अमृत यानि अ+मृत जो मृत नहीं होती ,जिसका
 नाश नहीं होता ,जो सदेव है ,अमर है
इस जनम मै जितनी भक्ति करोगे ,जितनी सीड़ी 
चड़ोगे , मृत्यु के साथ वह समाप्त नहीं होगी , 
अगले जन्म में अगली सीढी  से प्रारंभ करना होगा 

पिछली सीढीयां  अमर है ,हर जनम मे जुड़ती  जायगी 
भक्ति का नाश नहीं , न ही भक्त का नाश है -'न मे भक्त प्रनश्यति'
बकि  कर्म का फल 
भोग या मृत्यु के साथ समाप्त हो जाता है 

अतः  इस भक्ति अमृत का अवश्य पान करो 
जितना हो उतना करो -यह अमर है -हर जन्म में जुड़ता रहेगा 

JAI SHRI RADHE

DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA
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