Saturday, 24 June 2017

Lokik Priyata Ke karan

Lokik Priyata Ke /karan


 ✔  *लौकिक प्रियता के कारण*    ✔

▶ वैसे तो प्रिय लगने के अनेक कारण है
जो हमारी हां में हां मिलाये
जो हमारी प्रशंसा करे । वह सहज ही हमें प्रिय लगता है

▶ भगवान कृष्ण को भी उनकी प्रशंसा करने वाले
उनके गुण लीला का गान करने वाले
उनकी स्तुति करने वाले
उनकी पूजा करने वाले
उनकी भक्ति करने वाले

▶ इतने प्रिय है, इतने प्रिय है, कि भगवान उनको प्रिय तो क्या, उनके वशीभूत हो जाते हैं

▶ दूसरे हैं हमारे रिश्तेदार जैसे पति, पत्नी, बेटे-बेटिया, मामा, चाचा,  साले, जीजा आदि-आदि ।

▶ लेकिन यह जो रिश्तेदार हैं कोई कोई तो वास्तव में प्रिय लगते हैं कोई-कोई केवल रिश्ते  के कारण प्रिय लगाने पड़ते हैं, प्रिय लगते नहीं निभाने पड़ते हैं

▶ और कुछ होते हैं जो अकारण ही प्रिय लगते हैं उनके प्रिय लगने का कोई विशेष कारण नहीं होता है । या तो स्वभाव मिलता है या प्रभाव मिलता है या ऐसे ही पता नहीं क्यों अच्छे लगते हैं । कुछ मित्र भी प्रिय लगते हैं । भक्तों के मित्र भक्त ही होते हैं

▶ कुल मिलाकर जो प्रिय के लिए प्रिय लगते हैं उन्हीं से ही निभाना श्रेयस्कर है । क्योंकि प्रियता का आधार प्रियता ही होगा तभी ठीक होगा ।

▶ प्रियता का आधार रिश्ता होगा,
प्रियता का आधार चाटुकारिता होगी,
प्रियता का आधार धन के प्रति आकर्षण होगा,
प्रियता का आधार चटर-पटर होगा
प्रियता का आधार प्रशंसा होगा

▶ तो यह कारण समाप्त होने पर इनका कार्य प्रियता समाप्त हो जाएगा और यदि प्रियता का आधार प्रियता होगा । कारण भी प्रियता कार्य भी प्रियता वह कभी समाप्त नहीं होगा  ।

▶ प्राय देखा भी गया है कि जहां प्रियता का अभाव होता है वहां रिश्ता टूट जाता है।

▶ लेकिन जिस प्रियता मेंं रिश्ते का भले ही अभाव हो वहाँ प्रियता कभी नहीं टूटती ।

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

 🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Friday, 23 June 2017

Madhurya Kadmbini Part 52

✴️माधुर्य कादम्बिनी कथा ✴️

भाग  5️⃣2️⃣

🎙  स्वर: दासाभास डा गिरिराज

🏚वृन्दावन धाम

🙇🏼 प्रस्तुति : अनंत हरिदास

http://yourlisten.com/Dasabhas/IwNjU3YT


Anadi Tatv



 ✔  *आइये, आज अनादि को समझें हम*    ✔

▶ अभी कुछ दिन पहले भी एक जिज्ञासा आई थी के कृष्ण कैसे मूल तत्व है । कृष्ण तो अभी 5500 वर्ष पूर्व आए हैं ।

▶ कृष्ण से पहले राम हुए हैं नरसिंह हुए हैं वह वामन हुए हैं तो, कृष्ण मूल तत्व कैसे हैं  । मूल तत्व तो कोई और हैं या मूल तत्त्व ब्रह्म है ।

▶ तो इसका समाधान हुआ था कि कृष्ण मूल तत्व है कृष्ण मूल अवतारी हैं कृष्ण के ही सारे अवतार समय-समय पर हुए चाहे वह राम हो चाहे नरसिंह हो चाहे वामन हो चाहे जो भी हो उनके गुणावतार भी हैं ब्रह्मा विष्णु महेश ।

▶ उनके स्वांश हैं बलराम । बलराम के अंश  सनकर्षण । संकर्षण के अंश है नारायण । नारायण, प्रथम पुरुष, द्वितीय पुरुष, तृतीय पुरुष
और इस बार स्वयं श्री कृष्ण पृथ्वी पर आये

Thursday, 22 June 2017

Madhurya Kadmbini Part 51

✴️माधुर्य कादम्बिनी कथा ✴️

भाग  5️⃣1️⃣

🎙  स्वर: दासाभास डा गिरिराज


🏚वृन्दावन धाम

🙇🏼 प्रस्तुति : अनंत हरिदास

http://yourlisten.com/Dasabhas/madhurya-51


Wednesday, 21 June 2017

Madhurya Kadmbini Part 50

✴️माधुर्य कादम्बिनी कथा ✴️

भाग  5️⃣0️⃣

🎙  स्वर: दासाभास डा गिरिराज


🏚वृन्दावन धाम

🙇🏼 प्रस्तुति : अनंत हरिदास

http://yourlisten.com/Dasabhas/madhurya-50#


Thursday, 15 June 2017

Madhurya Kadmbini Part 49

✴️माधुर्य कादम्बिनी कथा ✴️

भाग  4️⃣9️⃣

🎙  स्वर: दासाभास डा गिरिराज



🏚वृन्दावन धाम

🙇🏼 प्रस्तुति : अनंत हरिदास

http://yourlisten.com/Dasabhas/madhurya-49


Wednesday, 14 June 2017