Tuesday, 11 June 2013
Wednesday, 24 April 2013
284. chhoom lun tere charan
चूम लूं तेरे चरण, कंजों से कोमल सुख-भरण
बन के अली गूंजा करू, फूलों से जब सजा हो तू
मन के मंदिर में मेरे मोहन सदा बसा हो तू
Monday, 22 April 2013
283. balaatkaar kyon ?
बलात्कार क्यों ???
बलात्कार के बाद रोष, गुस्सा, होना
स्वाभाविक है, होना चाहिए, ठीक है.
लेकिन
बलात्कार आखिर होता ही क्यों है ?
क्या परिस्थितियां है , जो इसके लिए प्रेरित करती हैं ?
उनको कैसे रोका जाय ? जिससे बलात्कार हो ही नहीं
या सहजता या संभावना कैसे कम हों
इस विषय पर बहस होनी चाहिए
और सभी को मिलकर सावधानियों पर अमल करना चाहिए
बाद में किये जाने वाले रोष से बहुत बेहतर है
सावधानियो पर चिंतन व उन पर अमल !!!
जय श्री राधे
Tuesday, 9 April 2013
282.khak me moti
रूठे हैं अगर श्याम तो उनको मनाये कौन ?
अपनी जो बनी शान है उसको घटाए कौन ?
ग़र क़द्र करें वो तो ये दृग "बिंदु" नज़र हैं ,
वरना फ़िज़ूल ख़ाक में मोती मिलाये कौन ?
कुछ उनका भला होता तो करते भी खुशामद
कुछ उनका भला होता तो करते भी खुशामद
अपनी गरज के वास्ते अहसान उठाये कौन ?
अब तक तो रहे दोस्त, बराबर का था दावा ,
अब फ़र्जे ज़िन्दगी की शरायत उठाये कौन ?
माना की जान उनकी है, लेंगे वही आखिर,
पर बन के खतावार ये गर्दन झुकाए कौन ?
JAI SHRI RADHE
Monday, 8 April 2013
281. VRAJ KI KHOJ
व्रज की खोज
A DOCUMENTARY FILM BY SHRI DAYAVEER DAS N SCRIPT EDITING BY DASABHAS IS LAUNCHED ON 04/04/2013.
यह फिल्म व्रज , श्री चैतन्य महाप्रभु एवं छः गोस्वामि पाद पर प्रमाणिक व भावपूर्ण प्रस्तुति है . यह सी दी मैं उपलब्ध है
महाप्रभु के विषय में यह एक प्रथम व सफल प्रयास है . २ घंटे में महाप्रभु को इसके द्वारा जितना समझा जा सकता है , उतना शायद २ वर्ष के अध्ययन व ग्रन्थ पाठ से नहीं समझा जा सकता
Friday, 29 March 2013
280. bhakti yaa bhiksha
भक्ति अर्थात भिक्षा
जो देश के लिए समर्पित हो जाये
वह देश भक्त
जो पिता के लिए समर्पित हो जाये
वह पितृ भक्त
जो माता के लिए समर्पित हो जाये
वह माता भक्त
जिसका भक्त , जिसकी भक्ति
उसके लिए पूर्ण समर्पण
अपने सुख दुःख की कोई बात नहीं
यही बात भगवान की भक्ति में होनी चाहिए
उनके लिए पूर्ण समर्पण
अपने सुख दुःख की कोई बात नहि।
क्या हम ऐसा करते हैं ? शायद नहीं
हम भगवान् के लिए नहीं , अपने दुःख सुख के लिए
भगवान् की भक्ति करते हैं
ये भक्ति नहीं, भिक्षा है
निश्चित हो की हम भक्त हैं या भिखारी ?
JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA
Lives, Born, Works = L B W at Vrindaban
Saturday, 9 March 2013
279. dikhnaa
इस संसार में कुछ चीजें दिखती हैं
कुछ को अनुभव करना पड़ता है
सभी कुछ इन आँखों से नहीं दिखता है
जैसे वायु मंडल में होने वाला
अनेक कंपनी का नेटवर्क आँखों से नहीं दिखता
JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA
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