Thursday, 25 October 2012

264. DASHAHRAA


दशहरा 

आज एक फोन आया 
'और दशहरा कैसा मना ?'

मैंने कहा- भाई मेरे इर्द-गिर्द कोई 
रावण है ही नही या शायद मुझे दिखता नहीं 

तो कैसा दशहरा ???

ये तो गोविन्द की नगरी वृन्दाबन  है,
यहाँ तो बस आनंद ही आनंद है 
न रावण है न दशहरा !!! 

JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA

Saturday, 20 October 2012

263. gopi prem

विशुद्ध प्रेम 

गोपियों को कृष्ण से विशुद्ध प्रेम था

कृष्ण ब्रज में रहे , या मथुरा 
या द्वारका - इस बात से कोई फर्क नहीं पढ़ता है 

श्री कृष्ण को द्वारका में सुख है तो 
गोपियो इसी  में ही प्रसन्न  है 

वे कृष्ण के सुख में सुखी है, उनका अपना कोई  सुख नहीं है 
हमारे प्रियतम कही भी रहे ,कैसे  भी रहे
वे हमारे है उनका सुख एवं आनंद विधान 
ही हमारे प्रेम का आधार है 

यही शुद्ध प्रेम है 

JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA



gopi prem

263. gopi prem

विशुद्ध प्रेम 

गोपियों को कृष्ण से विशुद्ध प्रेम था

कृष्ण ब्रज में रहे , या मथुरा 
या द्वारका - इस बात से कोई फर्क नहीं पढ़ता है 

श्री कृष्ण को द्वारका में सुख है तो 
गोपियो इसी  में ही प्रसन्न  है 

वे कृष्ण के सुख में सुखी है, उनका अपना कोई  सुख नहीं है 
हमारे प्रियतम कही भी रहे ,कैसे  भी रहे
वे हमारे है उनका सुख एवं आनंद विधान 
ही हमारे प्रेम का आधार है 

यही शुद्ध प्रेम है 

JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA



gopi prem

263. gopi prem

विशुद्ध प्रेम 

गोपियों को कृष्ण से विशुद्ध प्रेम था

कृष्ण ब्रज में रहे , या मथुरा 
या द्वारका - इस बात से कोई फर्क नहीं पढ़ता है 

श्री कृष्ण को द्वारका में सुख है तो 
गोपियो इसी  में ही प्रसन्न  है 

वे कृष्ण के सुख में सुखी है, उनका अपना कोई  सुख नहीं है 
हमारे प्रियतम कही भी रहे ,कैसे  भी रहे
वे हमारे है उनका सुख एवं आनंद विधान 
ही हमारे प्रेम का आधार है 

यही शुद्ध प्रेम है 

JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA



gopi prem

Tuesday, 16 October 2012

262. vaishnav navraatra



वैष्णव नवरात्र 

नवरात्र में दुर्गा पूजा अति प्रचलित है 
दुर्गा प्रभु की एक शक्ति है। अनेक दुर्गाओं  का वर्णन 
ग्रंथों में प्राप्त होता है .

आदि दुर्गा वैष्णवों के श्री गोपाल-मंत्र की अधिष्ठात्री है 
यह अति-दुर्गम=कठिन श्री कृष्ण भक्ति को देने वाली है।
-इस भाव से की गयी दुर्गा-पूजा भक्ति का एक अंग हो सकती है 
दुर्गा को स्वतंत्र शक्ति मन कर की गयी पूजा शाक्त-पूजा है 

वैसे वैष्णवों को इन 9 दिनों में इन 9 अंगों का श्रद्धा सहित 
विशेष अनुष्ठान पूर्वक पालन करना चाहिए 

1. श्रवण = कथा या ग्रंथ्-पाठ  सुनना
2. कीर्तन = संकीर्तन का आयोजन 
3. स्मरण = जप पूर्वक प्रभु का स्मरण 
4. पाद सेवन = श्री विग्रह की विशेष चरण सेवा व चरण दर्शन 
5. अर्चन = श्री विग्रह की विशेष श्रृंगार आदि से सेवा-अर्चना, आरती  
6. वंदन = पद गान द्वारा प्रभु की आज विशेष वन्दना 
7. दास्य = में प्रभु का नित्य दास हूँ -इस भाव को दृढ़ करते हुए प्रभु-सेवा में लगना 
8. सख्य = प्रभु ही मेरे सच्चे मित्र है - इस भाव को दृढ़ करते हुए प्रभु-सेवा में लगना 
9. आत्म निवेदन = अपने आप को सब प्रकार से प्रभु को समर्पित करना  

इस प्रकार नवरात्र का आयोजन करना वैष्णव नवरात्र है   

JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA

Monday, 15 October 2012

261. gopiyon ko kya fark hai

गोपियों को फरक नहीं पड़ता 

ब्रज गोपियों को किसी ने सन्देश दिया की 
आज तो श्री कृष्ण ने मथुरा की कुबड़ी 'कुब्जा ' को 
अपना लिया है , अब  वह तुम्हारे नहीं रहे 

Saturday, 13 October 2012

260 heere se kanch


हीरे से कांच काटना 

हीरा एक बहुमूल्य वस्तु  है
इसे प्राप्त कर इससे कोई यदि कान्च काटता  है तो ठीक है 
लेकिन यह इसका सर्व श्रेष्ठ उपयोग नहीं है