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Friday, 31 March 2017

वेश दीक्षा

वेश दीक्षा


​ ✔  *वेश दीक्षा*    ✔

▶ एक वैष्णव को जब अध्यात्म में, भजन में प्रवेश करना होता है, सबसे पहले उसको भजन, भगवान, भक्ति, अध्यात्म में श्रद्धा होती है ।

▶ श्रद्धा के बाद भगवान के भक्ति में, भजन में लगे हुए वैष्णव जन, साधु जन का वह संग करता है। साधु जन का संग करने से उसको अनेक साधु वैष्णव में से किसी एक का आश्रय ग्रहण करना पड़ता है ।

▶ क्योंकि अध्यात्म में भी अनेक मत हैं । अनेक संप्रदाय हैं । अनेकों उपास्य हैं । अनेक उपासना हैं । उन सब में से कुछ एक चुनना पड़ता है ।

▶ यह कोई बुराई नहीं है । यह ईश्वर द्वारा प्रदत्त जीव की रुचि के लिए विविधता प्रदान की गई  है ।