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Sunday, 5 November 2017

Shringaar Vatt Vrindavan

Shringarvatt

✔  *श्रृंगार वट* ✔

▶ वृन्दाबन की परिक्रमा मार्ग में इम्लितला से 5वीं जीर्ण शीर्ण बिल्डिंग है । प्राचीन सिद्ध स्थान है ।

▶ यह लगभग जमुना के तट पर स्थित है । कभी इसके घाट पर यमुना जी भी बहती थी । रास लीला में जब श्री राधा जी चली गई तब श्री राधा जी का इस स्थान पर ठाकुर ने श्रृंगार किया था ।

▶ इसलिए इसका नाम श्रृंगार वट है । साथ ही जब नित्यानंद प्रभु आए तब नित्यानंद प्रभु ने भी यहां पर वास किया था ।

▶और आज भी यहां नित्यानंद प्रभु के वंशज उनके पुत्र के पुत्र के पुत्र के पुत्र यही विराजमान हैं ।

▶ श्रीनित्यानंद प्रभु के वंशज और उनके शिष्य उनका वंश आज भी श्रृंगार वट में विराजमान है

▶ श्री श्रृंगार वट सप्त देवालयों की गुरु गद्दी है । क्योंकि यह नित्यानंद प्रभु का स्थान है । सप्त देवालय गोस्वामी पाद के स्थान हैं ।  रूप,  सनातन श्री जीव श्री गोपाल भट्ट आदि ।

▶ नित्यानंद  प्रभु है । इसलिए यह गुरु गद्दी है लेकिन समय के प्रभाव से जीर्ण शीर्ण अर्थहीन ऐश्वर्य हीन होने से अब यहां कोई इसको पूछता नहीं है । स्वाभाविक भी है ।

▶ लेकिन यह स्थान सिद्ध है ।

▶प्रिया जी का यहां ठाकुर ने श्रृंगार किया है
और नित्यानंद प्रभु के यहां पर चरण पड़े हैं
नित्यानंद प्रभु के वंशज यहां आज भी विराजमान हैं

▶ यहां निताई गौर और प्रिया प्रीतम के दुर्लभ विग्रह हैं । सेवा पूजा आज भी विधि विधान से श्रद्धा पूर्वक होती है ।

▶ जो अंतरंग भक्त हैं, वैष्णव है । वह नियम से प्रतिदिन यहां दर्शन करते हैं । बहुत बड़ा प्रांगण दर्शनीय है । अवश्य दर्शन करना ही चाहिए

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Wednesday, 13 July 2016

अच्छे सन्त आज भी हैं

*अच्छे सन्त आज भी हैं*

☺हम प्राय कहते हैं कि आजकल संत । अच्छे संत मिलते कहाँ हैं । बिलकुल ठीक है । अच्छे सन्त टीवी । फेसबुक । वत्सप्प पर नही मिलते हैं ।

👌सच्चे सन्त ऐसे इधर उधर घूमते घामते बाह्य क्रियायों में भी नही दीखते

💐उन्हें किसी से मिलकर मीठी मीठी बात बना कर सम्बन्ध बनाना भी नही आता है और न चाहते हैं

▶ ऐसे संत कहीं एकांत में अपने मतलब से मतलब रखते हुए जन समुदाय से दूर भजन म लगे रहते हैं ।

💐ऐसा ही एक स्थान है वृन्दाबन में । जालान बाग़ । जिसका परिचय मुझे धाम में जन्मे होने पर भी अभी 4।5 दिन पहले मिला ।

😢 ये स्थान हरे भरे वृक्षों से पूर्ण । लता पताओं से युक्त एकदम शांत एवम् कहीं यमुना तट पर स्थित है । अभी मेने भी दर्शन नही किये

👌यहाँ भागवत निवास एवम् टटिया स्थान की तरह  40 । 50 सन्त रहते हैं । भजन भजन भजन पर ही केंद्रित हैं । किसी भी भण्डारे म नही जाते हैं

▶ भोजन भी पता नही कहाँ से कौन व्यवस्था करता है । कभी घी घना । कभी सूखा चना । कभी वो भी बना न बना । वाली स्थिति में हैं

💐उस स्थान का नाम है जालान बाग़ । विशुद्ध सन्त वहां रहते हैं । बस भजन ही उनका उद्देश्य है । उनका कोई नाटक नहीं । इन्हें ढूँढना पड़ता है । ये सहज नही मिलते । इसलिए हम कहते हैं कि सच्चे सन्त कहाँ हैं । लेकिन हैं । होते हैं ।

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚


🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
LBW - Lives Born Works at vrindabn






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अच्छे सन्त आज भी हैं




Monday, 26 September 2011

82. 7 dham, 14 lok n pitr lok

✅  7 धाम 14 लोक और पितृ लोक   ✅

▶ ७ नित्य धाम हैं 

▶ १. वृन्दाबन (सबसे ऊपर)पूर्णतम

▶ २. मथुरा (पूर्णतर)

▶ ३. द्वारका (पूर्ण)

▶ ४. अयोध्या

▶ ५. वैकुण्ठ

▶ ६. सिद्ध लोक 

▶ ७. विरजा : कारण समुद्र


▶ १४ लोक


▶ १. सत्य

▶ २. तप

▶ ३. जन

▶ ४. मह

▶ ५. स्वर्ग

▶ ६. भुवः

▶ यहाँ पर अंतरिक्ष में  एक पितृ लोक भी है, जहाँ सज्जन पितृ रहते हैं 

▶ ७. भू (पृथ्वी)

▶ ८. अतल

▶ ९. वितल

▶ १०. सुतल

▶ ११. तलातल

▶ १२. महातल

▶ १३. रसातल

▶ १४. पाताल

▶ इसके नीचे जल में ३ स्थान हैं १. यमराज का महल, २.नरक, ३. पितृ लोक-यहा सामान्य  पितृ रहते हैं

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚




DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia
Lives, Born, Works = L B W at Vrindaban