👂 मूल श्रवण शैली 👂
परिप्रश्नेन सेवया । अर्थात प्रश्न करके जिज्ञासा करके । पूछकर भी साधु की सेवा होती है ।
🚶धर्म के विषय में ।
🚶अध्यात्म के विषय में ।
🚶भजन के विषय में ।
🚶भजन के अंगों के विषय में ।
अपने से श्रेष्ठ सजातीय वैष्णव से अपने परम कल्याण के विषय में प्रश्न पूछना भी एक साधुसेवा ही है ।
🍎तंबू या पंडाल लगाकर 1000 या 2000 आदमियों को इकट्ठा करके किसी एक विषय पर बोलना यह आधुनिक शैली है
