🐿 नाम में प्रवेश 🐿
भाव कुभाव अलख आलस हूं
नाम जपत मंगल दिसि दश हूं
🍎अर्थात भावसे कुभाव या अभाव से ना चाहते हुए आलस्य से भी यदि नाम जप किया जाए तो मंगल होता है
🎯पहली बात तो यह है कि यह नाम न करने वाले बिल्कुल प्राइमरी साधक के लिए ये उपदेश है
♦️साथ ही आप ध्यान से देखें तो इसमें यह नहीं लिखा हुआ कि इस प्रकार नाम करने से नाम का प्रमुख फल श्री कृष्ण चरण सेवा प्राप्त हो जाएगी ऐसा इसमें नहीं लिखा
♦️इसमें लिखा इस प्रकार नाम करने से मंगल होगा । मंगल क्या होगा । मंगलम मंगलानाम । यह मंगल होगा कि नाम में हमारी श्रद्धा हो जाएगी । नाम में हमारी निष्ठा हो जाएगी । नाम में हमारी रुचि हो जाएगी । नाम में हमारी आसक्ति हो जाएगी
🔔यह शुरू करने के लिए है और जब हम शुरु करेंगे और नाम को गंभीरता से लेंगे । नाम में आने वाले
🌳लय । विक्षेप । अप्रतिपत्ती । कषाय ।रसास्वाद आदि पांच विघ्नों के प्रति सावधान रहेंगे तो नाम के द्वारा फिर हमें नामी का अनुभव होते हुए नाम के रस का आस्वादन प्राप्त होगा
🏃🚶🏃और फिर धीरे धीरे हम श्री कृष्ण चरण सेवा की और हम बढ़ेंगे
