Thursday, 17 December 2015

[20:48, 12/12/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:

गरीब

होना बुरी बात नही ।
भारत में 80 प्रतिशत हम आप गरीब ही हैं ।

अपने आप को अपने से अधिक बड़ा आदमी समझना ही
सब क्लेशों की जड़ है ।

गरीब वो नही
जिसके पास पैसे कम हैं
गरीब वो है जिसके खर्चे आय से
अधिक हैं

चिंतन करो । कोई गरीब नही


[20:48, 12/12/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:

 द्वापर युग की बात है।

एक बार पाँच पाण्डव वनों में घूमते-घूमते, श्रीनित्यानन्द जी के जन्म स्थान, पश्चिम बंगाल के एकचक्र नामक गाँव में पहुँचे।

पाण्डव स्वभाव से ही सज्जन भक्त थे व लोगों की सेवा में व्यस्त रहते थे।
स्थानीय लोगों के अनुरोध पर भीम ने एक शक्तिशाली राक्षस का वध भी किया था।

युधिष्ठिर एकचक्र के सुन्दर वातावरण, महकते वायु मण्डल को देख अत्यधिक चकित थे।

इतने वनों में वे घूमे पर ऐसा मनमोहक उपवन उन्होंने नहीं देखा था।
उनके मन में रह-रह कर यही बात उठती थी की हो न हो इस स्थान का श्रीकृष्ण से जरूर कुछ सम्बन्ध है अन्यथा इसमें इतनी सुन्दरता होने का कोई कारण नहीं है।

परन्तु फिर वो यह विचार करने लगे कि श्रीकृष्ण ने कभी जिक्र नहीं किया।

उसी उधेड़-बुन में वे सो गये तो रात के समय स्वप्न में उन्हें भगवान बलराम जी ने दर्शन दिये।

भगवान बलराम बोले, -- 'यहाँ से कुछ ही दूरी पर नवद्वीप नामक स्थान है गंगा नदी के किनारे ।

कलियुग के प्रारम्भ में श्रीकृष्ण, एक ब्राह्मण के घर में, नवद्वीप में प्रकट् होंगे, हालांकि वे अपना रूप छिपाये रहेंगे।
उन्हीं की इच्छा से उनके सेवक- भक्त अनेक स्थानों पर जन्म लेंगे।
उन्हीं की इच्छा से मैं यहाँ पर जन्म लूँगा।'

इतना कह कर श्रीबलराम जी अदृश्य हो गये।

महाराज युधिष्ठिर की नींद टूट गयी व उन्होंने, स्वप्न की बात सभी भाईयों को सुनाई।

इधर कलियुग के प्रारम्भ में श्रीबलराम जी जब श्रीनित्यानन्द रूप में आये, उससे पहले ही उनका एकचक्र गाँव बहुत प्रसिद्ध हो चुका था।
इस में बहुत से मन्दिर थे।

एक बहुत ही प्राचीन शिव- पार्वती जी का मन्दिर भी था।
समीप ही एक विशाल नदी प्रभावती बहती थी, जिसमें 12 महीने पानी रहता था।
आसपास के वन में अहिंसक पशुओं की भरमार थी ।

रात-दिन कोयल की कु-कू, भ्रमरों की गुंजार, पक्षियों की चहचहाट होती रहती थी।

किसी को भी नहीं पता था की यह गाँव कहाँ से व कब प्रकट हुआ परन्तु यहाँ के निवासी बहुत ही सुख व आनन्द से रहते थे।

एकचक्र में वैभवशाली लोगों सहित विद्वान पण्डितों का भी वास था।

कुछ भविष्य ज्ञान कहते थे की इस स्थान पर श्रीबलराम प्रकट होंगे, अतः यह स्थान भी मथुरा-अयोध्या की तरह धाम है।
श्रीनित्यानन्द जी की कृपा के बिना पापी और अपराधी जीवों का उद्धार का कोई उपाय नहीं है।

श्रीमन् नित्यानन्द प्रभु भक्ति लीला करते हुए भी स्वरूपतः भगवत-तत्त्व हैं, उनके पार्षद उनकी कृपा शक्ति का मूर्त- स्वरूप हैं।
श्रीमन् नित्यानन्द प्रभु परम पतित-पावन हैं फिर उनके अन्तरंग पार्षद परम-परम पतित पावन हैं।
वस्तुतः श्रीमन् नित्यान्द प्रभु भक्तों के माध्यम से ही कृपा करते हैं।

महा-महा वदान्य श्रीनित्यानन्द प्रभु की जय...

[20:48, 12/12/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:

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    1⃣2⃣◆1⃣2⃣◆1⃣5⃣

            शनिवार मार्गशीर्ष
            शुक्लपक्ष प्रतिपदा

                     6⃣4⃣
                   
          ❗श्रीवृन्दावन वास❗

🌿    श्री वृन्दावन या ब्रज मण्डल में वास करना अंतिम अंग है l श्री वृन्दावन श्री कृष्ण की परम मधुर दिव्य लीलाओं का नित्य धाम होने से सर्वोत्कृष्ट सर्वोत्तम महिमायुक्त है lश्री वृन्दावनवास में साधन भक्ति के प्रायः समस्त अंगों का अपने आप सहज में आचरण हो जाता है l

    🌹6⃣4⃣ में से 5⃣🌹  

1⃣ साधु वैष्णवों का संग
2⃣ नाम संकीर्तन
3⃣ श्री मद्भागवत के अर्थो का श्रवण
4⃣ श्री विग्रह की श्रद्धापूर्वक सेवा
5⃣ ब्रजवास

🌿   यदि चौसठ में से उपरोक्त पाँच अंगो का पालन कर लिया जाये तो सम्पूर्ण भक्ति का अनुष्ठान हो जाता है lइसके विपरीत कुछ वृन्दावन में आश्रम में रहते तो है लेकिन न भजन न दर्शन न साधु सेवा न भजन क्रिया अपितु दिन में अनेक बार अपने बच्चों से फोन पर बात करना वृन्दावन वास नहीं है l

🌿    उपरोक्त सार डॉ दासाभास जी द्वारा प्रस्तुत ब्रजभक्ति के चौसठ अंग से लेते हुए  हम सबका जीवन भी प्रभु की भक्ति से प्रकाशित हो यही प्रार्थना है राधेश्याम के चरणों में l 👣👣
                 
                               ✏ मालिनी
 
         ¥﹏*)•🌺•(*﹏¥
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         "🌿सुप्रभात 🌿"
 ◆🌺श्री कृष्णायसमर्पणं🌺◆
      "🌿जैश्रीराधेकृष्ण🌿"
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[20:48, 12/12/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


💐श्रीराधारमणो विजयते 💐
🌻 निताई गौर हरिबोल🌻    

📚🍵ब्रज की खिचड़ी 🍵📚

       क्रम संख्या 2⃣1⃣

     🌿 स्त्री 🌿

💠स्त्रियों के सात गुण

🔱कीर्ति
🔱श्री
🔱वाक
🔱स्मृति
🔱मेधा
🔱धृति
🔱क्षमा

        🐚ब्राह्मण 🐚

👳🏻ब्राह्मण -सिर - विवेक है
👮🏻क्षत्रिय -हाथ - रक्षा
👲वैश्य -उदर -अर्जन
💂शूद्र -चरण- सेवा

        🌷अर्जुन 🌷

😴  निद्रा को जीतने वाले को गुड़ाकेश कहते हैं  । अर्जुन

उल्टे हाथ से तीर चलाने वाले को सव्यसाची कहते हैं - अर्जुन

        🙌प्रभु 🙌

👶🏻उत्पति
💥स्थिति
💀प्रलय

तथा अंतर्यामी रूप से शासन करने वाले होने से भगवान को प्रभु  भी कहते हैं

   🌿एक को चुनो 🌿

👫अपनी छोटी बहिन के साथ उसके कॉलेज जाओ उसकी कक्षा में बैठो थोड़ा लिखो पढ़ो और आ जाओ ।

📝 दूसरे दिन बड़ी बहिन के साथ जाओ  थोड़ा लिखो पढ़ो और आ जाओ।

केवल मनोरंजन है तो ठीक है, लेकिन यदि आप सीरियस हैं और यह कहे कि मैं भी तो किसी ना किसी बहन के साथ रोज कॉलेज जाती हूं तो आपका भ्रम है।

🎓 न आपको रोज जाने दिया जाएगा न परीक्षा में बैठने दिया जाएगा न डिग्री मिलेगी और न नौकरी।

🎷इसी प्रकार कभी कृष्ण,
कभी राम,
कभी शिव,
कभी माता करोगे तो हाल वही होगा,, मनोरंजन होगा बस..... यदि गंभीर हो तो किसी भी एक के हो जाओ।
एक को पकड़ लो।

🎎जिस प्रकार पति एक ।
रिश्ते अनेक पति एक,
अन्यथा चरित्रहीन कहलाओगी।।

📈एक को पकड़ो
📈एक को भजो
📈एक में निष्ठा,

📌चुनाव खुद करो सोच-समझकर

अर्थात समय आने पर सम्मान सबका । लेकिन इष्ट एक । उपासना एक की । आशा एक से
मांग एक से । उसी से ।

घर में पूजा लड्डू गोपाल की और मनौती वैष्णो देवी की । सोचिये

 🙌🏻जय श्री राधे। जय निताई🙌🏻

लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
📕श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन ।

📝 प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू


[16:49, 12/13/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


🌿◆◆﹏*))🌺((*﹏◆◆🌿

     1⃣3⃣*1⃣2⃣*1⃣5⃣
   
           शनिवार  मार्गशीर्ष
           शुक्लपक्ष द्वितीया

                     ★
               ◆~🌺~◆
       ◆!🙌🏻जयनिताई🙌🏻!◆  
     •🌺 गौरांग महाप्रभु 🌺•
       ◆!🙌🏻 श्री चैतन्य 🙌🏻!◆
                ◆~🌺~◆
                      ★

🌿    संसार में जब अत्याचार बढ़ जाते है लोग अन्याय हिंसा स्वार्थ सिद्धि में प्रवृत्त हो जाते है धर्म के नाम पर अनर्थ होने लगते हैं समाज और राष्ट्र का पतन होने लगता है तब श्री भगवान किसी रूप में अवतार ग्रहण करते हैं और संसार को सत्य के रास्ते पर चलाते हैं l आपके अवतार लेने से  पहले आसुरी वृत्ति के लोगो का बोलबाला था l राम कृष्ण में भेद दृष्टि फैलाकर भक्ति मार्ग को दूषित किया जा रहा था l

🌿     महाप्रभु श्री चैतन्य ने बताया कि कृष्ण भक्ति में प्राणिमात्र का अधिकार है l जीव -मात्र श्री कृष्ण का नित्य दास है lउन्होंने सांप्रदायिक संकीर्णता, जातिवाद का विरोध किया l निर्भीकता स्वावलंबता दृढ़ भगवत शरणागति पर आपने जोर दिया lआराध्य एवं आराधना का अति आनंदमय एवं निर्मल स्वरूप प्रकाशित कर श्री हरिनाम को साधन ही नहीं साध्य के रूप में प्रकाशित किया l

🌿     उपरोक्त सार
व्रजविभूति श्रीश्यामदासजी के ग्रंथ से लेते हुए हम भी अपने जीवन को भक्तिमय बनाये यही प्रार्थना है प्रभु के चरणों में l

✏ मालिनी
 
        ¥﹏*)•🌺•(*﹏¥
             •🌿@🌿•
        •🙌🏻 सुप्रभात🙌🏻•
   🌺श्री कृष्णायसमर्पणं🌺
     🙌🏻जैश्रीराधेश्याम🙌🏻•
              •🌿@🌿•
          ¥﹏*)•🌺•(*﹏¥
   
🌿◆◆﹏*))🌺((*﹏◆◆🌿


[16:50, 12/13/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


 दैनिक भजन

हम लोग जो प्रतिदिन भजन
करते हैं । वह निश्चित ही
श्री कृष्ण को सुख प्रदान करने के लिए ही करते हैं और वे सुखी या आनंदित होते भी हैं

अब जब वो आनंदित होते हैं तो हम बिना आनंद के कैसे रह
सकते हैं ।हमे भी आनंद मिलता ही है

फिर भी हमारे जो कुछ लौकिक अभाव या कामनाएं हैं । उन्हें
सब पता ही है । वे पूरी करेंगे ही । फिर भी यदि कोई कामना पूरी करवानी हो तो

उसके लिए दैनिक भजन से अलग कुछ विशेष भजन । जप आदि करना चाहिए । जो अपने सुख के लिए होगा ।

कृष्ण के सुख के लिए रोज़ वाला नियम कम नही करना चाहिए ।

समस्त वैष्णवजन को मेरा सादर प्रणाम । जय श्रीराधे । जय निताई
[09:40, 12/14/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:

दुनिया में रहने की सबसे अच्छी दो जगह ‘किसी के दिल में’ या ‘किसी की दुआओं में’ !!

[09:40, 12/14/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:

जय हो
दोनों में स्वार्थ है
जब तक उसका फेवर करते रहोगे तब तक दिल में जगह मिलेगी और दुआ भी मिलेगी
सच भी हो लेकिन फेवर म न हो तो दोनों खत्म ।
अतः सबसे उत्तम स्थान
श्याम सुन्दर के चरणों में
जय श्री राधे । जय निताई


[09:40, 12/14/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


💐श्रीराधारमणो विजयते 💐
🌻 निताई गौर हरिबोल🌻    

📚🍵ब्रज की खिचड़ी 🍵📚

       क्रम संख्या 2⃣2⃣

🌿 काम, क्रोध, लोभ,मोह 🌿

😡किसी वस्तु को प्राप्त करने की इच्छा का नाम है - काम

उस वस्तु के प्राप्त न होने पर क्रोध होता है।

उस वस्तु को और अधिक - अधिक चाहने का नाम लोभ है।

💦 वे वस्तुएं कम न हो, नष्ट न हो, यह भाव मोह है ।

उन वस्तुओं के कारण जो श्रेष्ठत्व का भाव् है, वह है मद ।

जितनी वस्तुएं या धन संपत्ति मेरे पास है,  उतनी दूसरे के पास क्यों है। यह है मात्सर्य । ईर्ष्या ।

💚 प्रेम इन सबसे अलग एक श्रेष्ठ भाव है। प्रेम और मोह का दूर-दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं। मोह में नष्ट न होने का भाव् है।  प्रेम में अपने बारे में कुछ सोचना ही नहीं है। हमेशा और हमेशा प्रियतम के हित,  सुख की बात करनी है ।

🍄अपनी बात आते ही प्रेम; काम या कामना बन जाता है।  एक और बहुत पक्की बात है जो 99.9 प्रतिशत लोगों को समझ में नहीं आती है ।

यदि कृष्ण से है तो वह है प्रेम,  किसी भी और से हो तो वह है काम या कामना या स्वार्थ ।

🙌क्योंकि प्रेम के विषय एकमात्र श्रीकृष्ण ही है

अन्य संसारिक लोग या वस्तु नहीं

     🌿सच्चा प्रेम 🌿

📖 श्री मदभागवत की
'अजातपक्षा; इव' शलोक में एक चिड़िया के बच्चे का उदाहरण दिया गया है।

🐥जिसमें बच्चे के पंख नहीं है । और गिद्ध की दृष्टि उस पर पड़़ जाती है। वह माँ - माँ  पुकार रहा है । इसमें मां को याद करने का उद्देश्य अपने जीवन की रक्षा की चाह है।

 🐄 दूसरा उधारण है बछड़े का। उसे घास दो।  नहीं ले रहा, कुछ भी खाने को दो नहीं खा रहा । वह तो केवल माँ -माँ पुकार रहा है इसमें भी अपनी भूख मिटाने हेतु माँ- माँ करना है।

👰🏻 तीसरा उदाहरण है नवविवाहिता नारी का,  जो है तो पीहर में लेकिन अपने प्रियतम  की समृति में क्षीण हुई जा रही है। और चाहती है कि मैं अपने पति के पास जाऊं और  उनकी यथोचित सेवा करूं।

🙇 मेरे बिना वह कष्ट पा रहे होंगे। यह भाव् स्वामी सेवा के लिए उपयुक्त है

इसमें अपने सुख कामना नहीं है। एक साधक की यह एक प्रेमी की यही भावना ही सच्चा प्रेम है।

💧अन्यथा सब स्वार्थ ही  है

🙌🏻जय श्री राधे। जय निताई🙌🏻

लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
📕श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन ।

📝 प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू


[09:40, 12/14/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


किसी ने मुझसे कहा आपकी आँखें बहुत खूबसूरत हैं;

मैंने कहा ये रोज बिहारी जी को देखती है...🌹👣😊
[09:43, 12/14/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia: @🌿﹏*))🌸((*﹏🌿@

     1⃣4⃣*1⃣2⃣*1⃣5⃣
   
           सोमवार  मार्गशीर्ष
           शुक्लपक्ष तृतीया

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       ◆!🌿जयनिताई🌿!◆  
     •🌸 गौरांग महाप्रभु 🌸•
       ◆!🌿 श्री चैतन्य 🌿!◆
                ◆~🌸~◆
                      ★

              ❗जन्म❗

🌿     श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव संवत् 1542  फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन नवद्वीप में हुआ l इनके पिता का नाम पंo श्री जगन्नाथ मिश्र था और माता का नाम श्री शचीदेवी था l यह दम्पति परम सदाचारी और भगवद्भक्त था l

❗    इनका जन्मनाम विश्वम्भर था l माता पिता इन्हें निमाई नाम से पुकारते थे l इनका शरीर सोने के समान अति कान्तिमय था अतः इन्हें गौर या गौरांग भी कहते हैं ❗

🌿    इनके बडे भाई का नाम विश्वरूप था l विश्वरूप कम उम्र में ही सब विद्या में पारंगत हो गए थे और इन्हें संसार से वैराग्य हो गया l एक दिन विश्वरूप माता पिता और छोटे भाई को छोड़कर चल दिये और सन्यासी हो गये l

🌿     उपरोक्त सार
व्रजविभूति श्रीश्यामदासजी के ग्रंथ से लेते हुए हम भी अपने जीवन को भक्तिमय बनाये यही प्रार्थना है प्रभु के चरणों में l
          क्रमशः........
                      ✏ मालिनी
 
        ¥﹏*)•🌸•(*﹏¥
             •🌿@🌿•
        •🌸सुप्रभात🌸•
   🌿श्री कृष्णायसमर्पणं🌿
     •🌸जैश्रीराधेश्याम🌸•
              •🌿@🌿•
          ¥﹏*)•🌸•(*﹏¥
   
@🌿﹏*))🌸((*﹏🌿@



गहनो कर्मणा गति

अर्थात कर्म एवम् फल की गति
अति गहन एवम् सूक्ष्म है

इसे अदृष्ट भी कहा गया है अतः
वैष्णवों को इस पर चर्चा करने को भी मना किया गया ह

अनेक बार प्रयास करने पर भी शुभ कर्म नही हो पाता है एवम्
बिना प्रयास के पाप हो जाता ह
कर्म हो या फल कुछ भी पूरी तरह से हाथ में नही ।

जन हमारे हाथ में नही तो क्यों व्यर्थ समय गवाया जाय । हाथ में है भजन । इसलिए एक वैष्णव को सदा पाप पुण्य की चर्चा से बच कर भजन में लगना चाहिए । पापों से बचना चाहिए

समस्त वैष्णवजन के श्रीचरणों में सादर प्रणाम । जयश्री राधे जय निताई
अच्छा

अच्छा होना
एवम्
अच्छा लगना

दोनों के
अंतर को
समझना है

शराब
अच्छी लगती ह
होती नही

ऐसे ही
बहुत सी
और भी चीज़ें ...

क्या सोचते हैं आप ??


एक वैष्णव
यदि
उसे अपना
नित्य कृष्ण दास
स्वरूप याद
रहता है तो
वह
आशीर्वाद कैसे
दे सकता है
वो तो दास है

यदि देता है तो
वह भूल गया है

वो तो सदा
यही कहता है

प्रभु तुम पर कृपा
करें ।

क्या सोचते हैं
आप
💐श्रीराधारमणो विजयते 💐
🌻 निताई गौर हरिबोल🌻    

📚🍵ब्रज की खिचड़ी 🍵📚

क्रम संख्या 2⃣3⃣

🌿लौकिक सुख 🌿

👷रोग रहित होना
💰ऋण रहित होना
✈परदेश में न रहना
👤सज्जनों के साथ परिचय प्रेम
💼मन एवं योग्यता अनुरूप
     व्यापार या नौकरी मिल जाना
😎मन में कोई भय न होना

💥विदुरनीति में मनुष्य लोक के 6 लौकिक सुख बताए हैं ।

लेकिन विचार करने पर प्राय: हम सभी इन सुखों से वंचित हैं।

✨नानक दुखिया सब संसारा
सोई सुखिया जे नाम उचारा

💦अतः श्री हरिनाम का आश्रय लेने से लौकिक सुख तो मिलेगा ही, दुर्लभ परम सुख भी सहज प्राप्त होगा।

🌿 प्रेम 🌿

💛पंचम पुरुषार्थ  है प्रेम ।

पुरुष का लक्ष्य क्या है,  उसे क्या प्राप्त करना है । उसके जीवन की सफलता क्या है - इसके लिए यह जानना आवश्यक है,  कि यह पुरुष या "जीव" है कौन ?

🙏जीवेर स्वरूप हय नित्य कृष्णदास । यह पुरुष श्री कृष्ण का नित्य,  सदा-सदा से दास हैं । दास का काम है सेवा । न कि सब समय मांगते ही रहना।

🙌सेवा भी ऐसी जिसमे प्रभु का सुख विधान हो। स्वामी की अनुकूलता हो, स्वामी को आनंद हो।  सेवा का नाम ही भक्ति है।

🐚केवल और केवल स्वामी का सुख, स्वामी की अनुकूलता,  स्वामी के आनंद को दृष्टि में रखकर की जाने वाली सेवा या भक्ति ही विशुद्ध भक्ति है।

💚प्रेम भी भक्ति का ही पर्याय है या यों कहे कि प्रेम के कारण ही ऐसी भक्ति की जा सकती है।

💢अतः  पंचम और सर्वश्रेष्ठ पुरुषार्थ है अपने स्वामी भगवान से ' प्रेम ' । पूर्व के चारों पुरुषार्थ का सामंजस्य  कुछ - कुछ इस प्रकार भी कर सकते हैं।  धर्म पूर्वक अर्थ अर्जित करो, उस अर्थ से अपनी उचित कामनाओं की पूर्ति करके उन कामनाओं  से मोक्ष या मुक्ति पा लो।

🎉मन भर लो और अंत में पंचम पुरुषार्थ प्रेम या भक्ति में ही जीवन को लगा लो।  तो तुम्हारा पुरुष  होना सफल हो जाएगा।

🙌🏻जय श्री राधे। जय निताई🙌🏻

लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
📕श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन ।

📝 प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू
✽🌿﹏*)(*🌹*)(*﹏🌿✽

     1⃣5⃣*1⃣2⃣*1⃣5⃣
   
           मंगलवार  मार्गशीर्ष
            शुक्लपक्ष चतुर्थी

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       ◆!🌿जयनिताई🌿!◆  
     •🌹 गौरांग महाप्रभु 🌹•
       ◆!🌿 श्री चैतन्य 🌿!◆
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  ❗तैर्थिक विप्र को दर्शन❗

🌿    एक दिन एक ब्राह्मण तीर्थ भ्रमण करता हुआ श्री पुरंदर मिश्र के घर आया l पंडित जी ने उसको सीदा सामान दिया ब्राह्मण ने रसोई तैयार की और गोपाल जी को भोग रख दिया और गोपाल मन्त्र का जाप करने लगे देखा तो बाल निमाई आनंद से रसोई पा रहे है l बड़े दुःखी हुए कि बालक ने भोग बिगाड़ दिया lमिश्र पुरंदर ने क्षमा याचना की और दुबारा सीदा सामान दिया lदूसरी बार भी वैसा ही हुआ l

🌿    तीसरी बार पुनः मिश्र जी ने निमाई को कमरे में बन्द कर दिया ब्राह्मण ने जब मंत्र का उच्चारण किया तो साक्षात् गोपाल को अपने सामने देखा l ब्राह्मण को ज्ञान हुआ कि मेरे गोपाल ही श्री निमाई रूप में प्रकटित हुए हैं l प्रसाद लेकर अपने को धन्य मानकर प्रभु के चरणों में प्रणाम कर तीर्थ यात्रा को चला गया l श्री निमाई ने ऐसे अनेक चरित्रों द्वारा अपने श्री कृष्ण स्वरुप का परिचय दिया l

🌿   उपरोक्त सार व्रजविभूति श्रीश्यामदासजी के ग्रंथ से लेते हुए हम भी अपने जीवन को भक्तिमय बनाये यही प्रार्थना है प्रभु के चरणों में l
          क्रमशः........
                      ✏ मालिनी
 
       ¥﹏*)•🌹•(*﹏¥
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         •🌹सुप्रभात🌹•
 •|🌿श्रीकृष्णायसमर्पणं🌿|•
     •🌹जैश्रीराधेश्याम🌹•
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✽🌿﹏*)(*🌹*)(*﹏🌿✽