Friday, 30 May 2014

340. karpentar nd manushya 11049



कारपेंटर एवं मनुष्य 


एक मनुष्य यदि यह कहे कि 
कुछ भी कर सकता हूँ , लेकिन 
मै भजन नहीं कर सकता 

यह बात लगभग ऐसे ही है जैसे 
एक कारपेंटर कहे कि कुछ भी करा लो,
लेकिन मैं लकड़ी व फर्नीचर का काम नहीं कर सकता हूँ 

जिस प्रकार लकड़ी का काम एक कारपेंटर ही 
कर सकता है - यही उसका मुख्य काम है 
उसी प्रकार पूरी सृष्टी में एक मनुष्य ही है 
जो भजन कर सकता है.

JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA

Thursday, 22 May 2014

339. PAAP KA FAL 11034


तुम्हारे पाप का फल है ये !


एक व्यक्ति का मकान अचानक चकनाचूर हो गया
वह दुबारा मकान बनाने की स्थिति में नहीं था, अतः झल्लाकर
धर्माचार्यों के पास गया और कहा कि-

आप भगवान् के अति निकट हैं, आप भगवान् से
प्रार्थना करके मेरा मकान दुबारा बनवा दीजिये

धर्माचार्यों ने भगवान् से बात की, और असलियत का पता लगाया
और उस बन्दे को बताया कि -

तुम पिछले जन्म में एक बिल्डर थे, तुमने बहुतों को बेघर किया था
तुम्हे उस पाप कि सज़ा मिली है, और अब तुम्हे भी पूरे जीवन
इधर-उधर भटकना होगा, अब तुम्हारे भाग्य में मकान नहीं है

वह बन्दा झल्ला गया, बोला में पिछले जन्म को नहीं मानता हूँ
धर्माचार्यों ने कहा, ठीक है, तो भगवान् को भी मत मानो
पिछ्ला जन्म, भगवान्, धर्म, शास्त्र, कर्म, पाप, पुण्य आदि यह पूरा package  है मानो तो पूरा, न मानो तो पूरा मत मानो,

नहीं मानते तो फिर तुम्हारा मकान गिरा, 
तुम जानो, इससे धर्म का , भगवान् का क्या मतलब ???

JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA

Saturday, 15 March 2014

338. holi - bhang - kalpana

holi - bhang - kalpana



होली - भंग - कल्पना 



मेरी एक प्रेयसी मुझसे ख़फ़ा  होगयी एवं 
झल्ला कर मुझ से बोली 
'आखिर तुम किस मिट्टी से बने हो ?'

मेने कहा-
मै ब्रजवासी हूँ, ब्रज में जन्मा हूँ, ब्रज में पाला हूँ 
ब्रज में ही बड़ा हुआ हूँ।  में  ब्रजकी उस मिट्टी से  बना हू 

जिसे खाकर - 
मेरा कन्हैया माखन की चोरी करने लगा 
एवं माखन चोर कहाया 

जिसे खाकर - 
मेरे कृष्ण ने दुष्टों को मारा एवं कंस - निकंदन कहलाये 

जिसे खाकर - 
गोपाल ने छल पूर्वक अनेक बार गोपियों को छला 
एवं छलिया कहलाये 

जिसे खाकर - 
माधव ने गोपियों के साथ रास रचाया और 
लम्पट कहलाये 

जिसे खाकर - 
मेरे कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया 
और सारथी कहलाये 

जिसे खाकर - 
मेरे गोविन्द ने गिरिराज धारण किया और 
गिरिधारी कहलाये 

जिसे खाकर - 
मेरे द्वारकाधीश ने सोलह हज़ार एक सौ आठ 
रानियों के साथ विवाह किया और योगेश्वर कहलाये 

अभी में और भी  बहुत कुछ कहने को था कि , वह 
खिलखिला कर हस गयी एवं मुझे कंठ लगा लिया 

बोली - में समझ गयी तुम सब ब्रजवासी ब्रज रज से 
बने हो, तभी तो कृष्ण को परम - प्रिय हो !

नोट - यह होली की भंग पीने के बाद की कल्पना है 
कृपया इसके प्रेयसी वाले अंशों को कोरी कल्पना ही समझें 
JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA

Wednesday, 6 November 2013

337. tej



तेज 


यह एक व्यक्ति के 
आचरण, भजन ,सज्जनता, विचार 
की  ही  ' शक्ति  '
होती  है, जिसके कारण उस व्यक्ति के 
सामने आने पर 
व्यक्ति सहज प्रभावित होता है 

और उसके तेज-पुंज से जाने-अनजाने 
प्रभावित होकर उस सज्जन पुरुष की 
बातों, सलाह, आदेश को स्वीकार कर लेता है 



JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA
Lives, Born, Works = L B W at Vrindaba